5 Aug 2013

अशआर, Ashaar

कोई पूछ रहा है मुझसे मेरी ज़िन्दगी की कीमत
मुझे याद आ रहा है तेरा वो हल्का सा मुस्कुराना


मुझ पर सितम ढा गये मेरी ग़ज़ल के शेर,
पढ़ पढ़ के खो रहे हैं वो किसी और के ख्याल में
--मरीज़

कमबख्त मानता ही नहीं दिल उसे भूलने को
मैं हाथ जोड़ता हूँ तो ये पांव पड़ जाता है

--अज्ञात 

वही ज़बान, वही बातें मगर है कितना फरक
तेरे नाम से पहले और तेरे नाम के बाद
--अज्ञात


कितना इख्तियार था उसको अपनी इस चाहत पे "अजनबी"
इस लिए जब चाहा याद किया, जब चाहा भुला दिया

--अजनबी एक गुमनाम शायर 


दिल लगी में वक़्त-ए -तन्हाई ऐसा भी आता है
कि रात चली जाती है मगर अँधेरे नहीं जाते

--अज्ञात

जाते हुए उसने सिर्फ इतना कहा था मुझसे
ओ पागल ... अपनी ज़िंदगी जी लेना, वैसे प्यार अच्छा करते हो

--अज्ञात 

28 Jul 2013

लुत्फ़ हम को आता है अब फ़रेब खाने में / आलम खुर्शीद

लुत्फ़ हम को आता है अब फ़रेब खाने में
आज़माए लोगों को रोज़ आज़माने में

दो घड़ी के साथी को हमसफ़र समझते हैं
किस क़दर पुराने हैं , हम नए ज़माने में

एहतियात रखने की कोई हद भी होती है
भेद हम ने खोले हैं , भेद को छुपाने में

तेरे पास आने में आधी उम्र गुजरी है
आधी उम्र गुज़रेगी तुझ से दूर जाने में

ज़िन्दगी तमाशा है और इस तमाशे में
खेल हम बिगाड़ेंगे , खेल को बनाने में

कारवां को उनका भी कुछ ख्याल आता है
जो सफ़र में पिछड़े हैं , रास्ता बनाने में

हमेशा दिल में रहता है कभी गोया नहीं जाता

हमेशा दिल में रहता है, कभी गोया (बताया) नहीं जाता
जिसे पाया नहीं जाता, उसे खोया नहीं जाता

कुछ ऐसे ज़ख्म हैं जिनको सभी शादाब(हराभरा) रखते हैं
कुछ ऐसे दाग़ हैं जिनको कभी धोया नहीं जाता

बहुत हँसने कि आदत का यही अंजाम होता है
कि हम रोना भी चाहें तो कभी रोया नहीं जाता

अजब सी गूँज उठती है दरो-दीवार से हरदम
ये उजड़े ख़्वाब का घर है यहाँ सोया नहीं जाता

ज़रा सोचो ये दुनिया किस क़दर बेरंग हो जाती
अगर आँखों में कोई ख़्वाब ही बोया नहीं जाता

न जाने अब मुहब्बत पर मुसीबत क्या पड़ी आलम
कि अहले दिल से दिल का बोझ भी ढोया नहीं जाता


 ---आलम खुर्शीद

27 Apr 2013

ashar

1.kash k wo lout aaye mujh se ye kehne
k tum kon hote ho mujh se bicharne wale

2.zakham khareed laya hoon bazar-e-dard se
dil zid kar raha tha mujhe mohabbat chahiye

3.Suna Hai Ishq Se Teri Bohat Banti Hai
Ek Ehsan Kar Us Say  Pooch Qasoor  Mera

4. Dekhta Hoon Tasveer-e-Yaar To Aata Hai Rashk
Her Baat La-Jawaab Thi Agar Bewafa Na Hota

5. Wo Kehta Hai Bata Tera Dard Kaise Samjhoon
Main ne Kaha Ishq Kar Bohat Kar Aur Kar K Haar Jaa

6Chod ye baat milay zakham kahan se mujhko
Zindagi itna bata kitna safar baqi hai

7Aaj usne aik aur dard dia to yaad aaya
Humne bhi to duaaon mein uske dard maangay thay
 

डूब गया एतबार करते हुए

तेरे फिराक के लम्हे शुमार करते हुए
बिखर गए है तेरा इंतज़ार करते हुए

मैं भी खुश हु कोई उससे जा के कह दे,
अगर वो खुश है मुझसे बेक़रार करते हुए

मैं मुस्कुराता हुआ आईने में उभरूँगा,
वो पड़ेगा अचानक सिंगार करते हुए

तुझे खबर ही नहीं टूट गया है कोई
मोहब्बत को बोहत पाईदार करते हुए

वो कह रही थी समंदर नही है आंखो में
मैं उन में डूब गया एतबार करते हुए

15 Apr 2013

मय साकी रिन्द मयखाना और वाइज

1.उनको खबर है मेरे टूटे अरमानों की
आज जरूरत पड़ेगी काँच के पैमानों की
खाली न होने देना जाम यारों
वरना  फिर से याद आ जाएगी गुजरे जमाने की !

2. हम अच्छे सही पर लोग ख़राब कहतें हैं;
इस देश का बिगड़ा हुआ हमें नवाब कहते हैं;
हम ऐसे बदनाम हुए इस शहर में;
कि पानी भी पिये तो लोग उसे शराब कहते हैं!

3 . रहे न रिन्द ये वाइज के बस की बात नहीँ।
तमाम शहर है दो चार दस की बात नहीँ॥
रिन्द=शराबी
वाइज=धर्मगुरू

4 गर बाजुओँ मेँ दम है तो मस्जिद को हिला कर देख।
नहीँ तो साथ बेठ दो घूँट पी और मस्जिद को हिलता देख॥

अज्ञात

5 चश्म - ए - साकी की एक बूंद को तरसा है दिल ,
आज जी भर के मेरे यार मुझको पीने दे ,
अपनी तन्हाईयों से तंग रहा हूँ मैं अब तक ,
अपने पहलू मे अब तो यार मुझको जीने दे ,
बड़ा बेदर्द था दर्द सुनी सुनी रातों का ,
सीने चाक जख्मों को तू आज तो सीने दे ,
भूल आया हूँ आज राह मैं मयखाने की ,
अपनी नजरों के ही दो जाम मुझको पीन दे

6 गम इस कदर मिला की घबरा के पी आए ,
खुशी थोड़ी सी मिली तो मिला के पी आए ,
यूं तो न थी जन्म से पीने की आदत ,
शराब को तन्हा देखा तो तरस खा कर पी आए

7 मस्जिद मेँ बुलाते हैँ हमेँ ज़ाहिदे-नाफहम।
होता कुछ अगर होश तो मयख़ाने न जाते

11 Apr 2013

अशआर


1.      वहां  से  एक  पानी  की  बूँद  न  निकल  सकी  ,
तमाम  उम्र  जिन  आँखों  को  हम  झील  लिखते  रहे

2.      कल  मिला  वक़्त  तो  जुल्फें  तेरी  सुलझाउंगा  , आज  उलझा  हूँ  ज़रा  वक़्त  को  सुलझाने  में ..!!

3.      वो  कहते   हैं  की  अगर  नसीब  होगा  मेरा  तो  हम  उन्हें  ज़रूर  पाएंगे ,
हम  पूछते  हैं  उनसे  अगर  हम  बदनसीब  हुए  तो .. उनके  बिना  कैसे  जी  पाएंगे

4.      मैं चाहता था ख़ुद से मुलाक़ात हो मगर आईने मेरे क़द के बराबर नही मिले

5.      मैं उसका हो नहीं सकता बता न देना उसे, सुनेगा तो लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा
हज़ार तोड़ के आ जाऊं उस से रिश्ता मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला लेगा !!!!

6.      दुनिया  में  और  भी  वजह  होती  है  दिल  के  टूट  जाने  की
लोग  युही  मोहब्बत  को  बदनाम  किया  करते  है  !!

7.      वो  एक  ख़त , जो  उस  ने  कभी  लिखा  ही  नहीं
में  रोज्ज़  बैठ  कर  , उस  का  जवाब  लिखता  हूँ ..

8.      मुझ  से  कहती  है  तेरे  साथ  रहूँगी  सदा 
बहोत  प्यार   करती  है  मुझसे  उदासी  मेरी

9.      कोई  तो  मोल  लगाए  मेरी  हस्ती  का  
किसी  की  आँख  के  आंसू  खरीदने  हैं  मुझे


10.  जान  दे  देंगे  ये  हमारे  बस  मैं  है ,
हम  नहीं  करते  बात  सितारे  तोड़  लाने  की


11.  मैं  बद -दुआ  तो  नहीं  देता   उसको   मगर दुआ  यही  है  ,उसे  मुझ  सा  न  मिले  कोई 



12.  मुलाकाते  जरूरी  है  अगर  रिश्ते  बचाने  है ,
लगा  कर  भूल  जाने  से  तो  पौधे  भी  सुख  जाते  है

13.  तेज़  रफ़्तार  ज़िन्दगी  का  ये  आलम  है  के ,
 सुबह  के  गम  शाम  को  पुराने  हो  जाते  हैं

14.  कुछ इसलिये भी तुम से मोहब्बत है
मेरा तो कोई नहीं है तुम्हारा तो कोई हो

15.  मैं चाहता हूँ फिर से वो दिन पलट आयें
कि माँ के चुल्लू को मेरा गिलास होना पड़े

16.  माँ के सामने कभी खुलकर नहीं रोना,
जहाँ बुनियाद हो, इतनी नमी अच्छी नहीं होती

17.  आंखें हैं कि उन्हें घर से निकलने नहीं देती
आंसू हैं कि सामान-ए-सफर बांधे हुए हैं

होटों पर हँसी

कभी होती थी तनहाइयों में भी मेरे होटों पर हँसी,
आज महफिलों में भी मुझे दर्द-ऐ-दिल हुआ करता है.
मेरे जीने की आरजू करते थे मेरे दुश्मन भी कभी,
आज मेरा हमदर्द भी मेरी रुक्सती की दुआ करता है.

समझता था ख़ुद को खुशनसीब जिसे मेरे दिल में पनाह मिलती थी,
आज अश्क भी मेरी आंखों में ख़ुद को यतीम समझता है.
खूबसूरत होता था हर वो कलाम जो मैं कलम से लिकता था,
आज लहू से लिखा "एहसास" भी ख़ुद को अल्फाज़ समझता है.

कभी जीता था मेरा कातिल भी मेरी आशिकुई की उम्मीद में,
आज मेरा दिल भी मेरी ज़िन्दगी के लिए कहाँ धड़कता है.
क्या होती है बेवफाई ये तो कभी मालूम न था,
आज ज़र्रा ज़र्रा मेरा मोहब्बत के लिए तड़पता है.

16 Mar 2013

आदते

तुमको क्या चाह हमारी सारी चाहते बदल गयी!!

अच्छी थी या बुरी पता नहीं  सारी आदते बदल गयी!!

क्या सोचा था की चाहेंगे किसी को अपने से ज्यादा!!

जो मशहूर थी हमारे लिए वो सारी  कहावते  बदल गयी!!

ये मोहब्बत भी है क्या रोग



ये मोहब्बत भी है क्या रोग ‘फ़राज़’
जिसको भूले वो सदा याद आया।

बहुत उदास है इक शख़्स तेरे जाने से
जो हो सके तो चला आ उसी की ख़ातिर तू

आ के अब तस्लीम कर लें तू नहीं तो मैं सही
कौन मानेगा के हम में बेवफ़ा कोई नहीं

ख़ुद को यूँ महसूर कर बैठा हूँ अपनी ज़ात में
मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं

फटी-फटी हुई आँखों से यूँ न देख मुझे
तुझे तलाश है जिस की वो शख़्स मर भी गया

सुना है बोलें तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं

उसकी वो जाने उसे पासे-वफ़ा था कि न था
तुम फ़राज़ अपनी तरफ़ से तो निभाते जाते।

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

यही कहा था मेरे हाथ में है आईना
तो मुझपे टूट पड़ा सारा शहर नाबीना

कितने नादान हैं तेरे भूलने वाले के तुझे
याद करने के लिये उम्र पड़ी हो जैसे

कहा था किसने के अहद-ए-वफ़ा करो उससे
जो यूँ किया है तो फिर क्यूँ गिला करो उससे

8 Mar 2013

मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं - अहमद फ़राज़


ये मोहब्बत भी है क्या रोग ‘फ़राज़’
जिसको भूले वो सदा याद आया।

बहुत उदास है इक शख़्स तेरे जाने से
जो हो सके तो चला आ उसी की ख़ातिर तू

आ के अब तस्लीम कर लें तू नहीं तो मैं सही
कौन मानेगा के हम में बेवफ़ा कोई नहीं

ख़ुद को यूँ महसूर कर बैठा हूँ अपनी ज़ात में
मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं

फटी-फटी हुई आँखों से यूँ न देख मुझे
तुझे तलाश है जिस की वो शख़्स मर भी गया

सुना है बोलें तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं

उसकी वो जाने उसे पासे-वफ़ा था कि न था
तुम फ़राज़ अपनी तरफ़ से तो निभाते जाते।

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

यही कहा था मेरे हाथ में है आईना
तो मुझपे टूट पड़ा सारा शहर नाबीना

कितने नादान हैं तेरे भूलने वाले के तुझे
याद करने के लिये उम्र पड़ी हो जैसे

कहा था किसने के अहद-ए-वफ़ा करो उससे
जो यूँ किया है तो फिर क्यूँ गिला करो उससे

मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं - अहमद फ़राज़


ये मोहब्बत भी है क्या रोग ‘फ़राज़’
जिसको भूले वो सदा याद आया।

बहुत उदास है इक शख़्स तेरे जाने से
जो हो सके तो चला आ उसी की ख़ातिर तू

आ के अब तस्लीम कर लें तू नहीं तो मैं सही
कौन मानेगा के हम में बेवफ़ा कोई नहीं

ख़ुद को यूँ महसूर कर बैठा हूँ अपनी ज़ात में
मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं

फटी-फटी हुई आँखों से यूँ न देख मुझे
तुझे तलाश है जिस की वो शख़्स मर भी गया

सुना है बोलें तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं

उसकी वो जाने उसे पासे-वफ़ा था कि न था
तुम फ़राज़ अपनी तरफ़ से तो निभाते जाते।

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

यही कहा था मेरे हाथ में है आईना
तो मुझपे टूट पड़ा सारा शहर नाबीना

कितने नादान हैं तेरे भूलने वाले के तुझे
याद करने के लिये उम्र पड़ी हो जैसे

कहा था किसने के अहद-ए-वफ़ा करो उससे
जो यूँ किया है तो फिर क्यूँ गिला करो उससे

मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं - अहमद फ़राज़


ये मोहब्बत भी है क्या रोग ‘फ़राज़’
जिसको भूले वो सदा याद आया।

बहुत उदास है इक शख़्स तेरे जाने से
जो हो सके तो चला आ उसी की ख़ातिर तू

आ के अब तस्लीम कर लें तू नहीं तो मैं सही
कौन मानेगा के हम में बेवफ़ा कोई नहीं

ख़ुद को यूँ महसूर कर बैठा हूँ अपनी ज़ात में
मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं

फटी-फटी हुई आँखों से यूँ न देख मुझे
तुझे तलाश है जिस की वो शख़्स मर भी गया

सुना है बोलें तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं

उसकी वो जाने उसे पासे-वफ़ा था कि न था
तुम फ़राज़ अपनी तरफ़ से तो निभाते जाते।

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

यही कहा था मेरे हाथ में है आईना
तो मुझपे टूट पड़ा सारा शहर नाबीना

कितने नादान हैं तेरे भूलने वाले के तुझे
याद करने के लिये उम्र पड़ी हो जैसे

कहा था किसने के अहद-ए-वफ़ा करो उससे
जो यूँ किया है तो फिर क्यूँ गिला करो उससे

मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं - अहमद फ़राज़


ये मोहब्बत भी है क्या रोग ‘फ़राज़’
जिसको भूले वो सदा याद आया।

बहुत उदास है इक शख़्स तेरे जाने से
जो हो सके तो चला आ उसी की ख़ातिर तू

आ के अब तस्लीम कर लें तू नहीं तो मैं सही
कौन मानेगा के हम में बेवफ़ा कोई नहीं

ख़ुद को यूँ महसूर कर बैठा हूँ अपनी ज़ात में
मंज़िलें चारों तरफ़ है रास्ता कोई नहीं

फटी-फटी हुई आँखों से यूँ न देख मुझे
तुझे तलाश है जिस की वो शख़्स मर भी गया

सुना है बोलें तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं

उसकी वो जाने उसे पासे-वफ़ा था कि न था
तुम फ़राज़ अपनी तरफ़ से तो निभाते जाते।

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

यही कहा था मेरे हाथ में है आईना
तो मुझपे टूट पड़ा सारा शहर नाबीना

कितने नादान हैं तेरे भूलने वाले के तुझे
याद करने के लिये उम्र पड़ी हो जैसे

कहा था किसने के अहद-ए-वफ़ा करो उससे
जो यूँ किया है तो फिर क्यूँ गिला करो उससे

हार जाने का हौसला है मुझे- अहमद फ़राज़

ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे
हमसफ़र चाहिये हूज़ूम नहीं
इक मुसाफ़िर भी काफ़िला है मुझे
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल
हार जाने का हौसला है मुझे
लब कुशां हूं तो इस यकीन के साथ
कत्ल होने का हौसला है मुझे
दिल धडकता नहीं सुलगता है
वो जो ख्वाहिश थी, आबला है मुझे
कौन जाने कि चाहतो में फ़राज़
क्या गंवाया है क्या मिला है मुझे
ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे
हमसफ़र चाहिये हूज़ूम नहीं
इक मुसाफ़िर भी काफ़िला है मुझे
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल
हार जाने का हौसला है मुझे
लब कुशां हूं तो इस यकीन के साथ
कत्ल होने का हौसला है मुझे
दिल धडकता नहीं सुलगता है
वो जो ख्वाहिश थी, आबला है मुझे
कौन जाने कि चाहतो में फ़राज़
क्या गंवाया है क्या मिला है मुझे

31 Jan 2013

इंतज़ार.... wait...

रूह छोड़ क़दमों में तेरे
बेजान जिस्म लिए जा रहा  हूँ
जीना क्या है
बस तेरे इंतज़ार का बहाना है
वक़्त की सूई में
उम्मीद के धागे से
मोहब्बत के ज़ख्म सिये जा रहा  हूँ..........

वो रोये तो बहुत















वो रोये  तो बहुत पर मुझसे मुह मोड के रोये  ...
कोई   मजबूरी रही होगी जो दिल तोड़ के रोये
मेरे सामने कर दिये मेरी तस्वीर के हज़ार टुकड़े
 पता लगा मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ के रोये !
 ---------------------------------------------------------
हो सकता है ये उसकी जिंदगी की सच्चाई हो
तोड़ दिया हो दिल मगर बाद में पछताई हो
आखिर ये सिलसिला कब तक चल पाएगा
जिस्म का हिस्सा दूसरे के बिना कब ताज रह पाएगा

--------------------------------------------------
क्या लेकर आया था क्या लेकर जाएगा
हुमसे दूर रह कर आपका दिल कब तक रह  पाएगा
 ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
2. बातों-बातों में बिछडने का इशारा करके
खुद भी रोये वो बहुत हमसे किनारा करके  !
जगमगा दी हैं तेरे शहर की गलियाँ हमने
अपने हर अश्‍क को पलकों का सितारा करके !
देख लेते हैं चलो हौसला अपने दिल का
और कुछ दिन तेरे बगैर गुजारा करके !!

29 Oct 2012

किताबो के पन्ने पलट के सोचते है

किताबो के पन्ने पलट के सोचते है ,
यूँ पलट जाये जिन्दगी तो क्या बात है,
तम्मना जो पूरी हो खवाबो में ,
हकीकत बन जाये तो क्या बात है
कुछ लोग मतलब के लिए ढूंढते है मुझे
बिन मतलब कोई आये तो क्या बात है ,
कतल करके तो सब ले जाएँगे दिल मेरा ,
कोई बातों से ले जाये तो क्या बात है ,
जो शरीफों की शराफत में बात न हो ,
एक शराबी कह जाए तो क्या बात है ,
जिन्दा रहने तक तो ख़ुशी दूंगा सबको ,
किसी को मेरी मौत पे ख़ुशी मिल जाये तो क्या बात है

27 Sept 2012

Dil se Dil ka Rutba Achha laga

Dil  se Dil ka Rutba Achha laga
Aaj Us Ko Sochna Acha Laga
Jate Jate Akhri Lamhaat Main
Mud ke usko Dekhna achhaa laga
Zindagi bhar us ne jo kuchha bhi kiya
Us Ka Har Ek Faisla Achhaa Laga
Har Taraf Thi bawafa logo ki bheed
Ek Wo Hi Bewafa Achhaa Laga..
______________________________
_____
Jab Teri Nigahon Main Raha Karte  The
Hum Bhi Chup Chap Phira Karte The
Aankhon Main Piyas Hua Karti Thi¬
Dil Main Toofan Hua Karte The
Log Aate The Gazal Sunane Ko
Hum Teri Batain Kiya Karte The
Kisi Veerane Main Tujh Se Mil Ke
Dil Main Kae Phool Khilla ya Karte The
Ghar Ki Deevar Sajane Ke Leye
Hum Tera Naam Likha Karte The
Wo Bhi Kya Din The Tuje Bhula Kar
Hum Tujhe Yaad Kia Karte The
Kal Tujhe Soch Kar Yaad Aaya
Hum Tujhe Pyar Kia Karte The

Nahi i Ban jata koi apna yunhi dil lagane se,
karni parti hai dua rabse sachha dost pane mein,
rakhna sambhalkar yeh yarana apna,
kahi tut naa jaye kisi or ke aane se.






Zamane se nahin hum tanhai se darte hain,
Pyar se nahin hum rusuvai se darte hain,
Dil meih umang hai tujhse milne ki
Par milne ke baad aane wali judaai se darte hain

Aankhon ki zuban wo samajh nahi pate,
Hoth magar kuch keh nahi pate,
Apni bebasi kis tarah kahe,
Koi hai jiske bina hum reh nahi pate

Badi asaani se dil lgaaye jaate hain
Par badi mushkil se waade nibhaye jaate hain
Le jaati hai mohabbat un raaho par
jaha diye nahi dil jalaaye jaate hain

Hum apni nazar ka izhar isliye nahi karte kyon k
Hum unki han ya na se darte hain,
Agar haan kar di to khushi se mar jayenge,
Agar unhone naaa kardi to ro ro ke mar jayenge ,
Baat ye nahi k hum apni maut se darte hain,
Hamari maut pe beh na jaye unka ek ansoo bhi,
Kyou Ki hum un do ansuon ki kadar karte hain



jidher bhi jaoon nazar mein us ka chehra rahta hai
Wo mere sabhi raastoon mein rahta hai
bichhad kar us se pereshan mein to hoon
par suna hai wo bhi uljhanoon mien rahta hai

Zindagi Udas Hone Ka Naam Nahi,
Dosti Sirf Paas Hone Ka Naam Nahi.
Agar Tum Door rehkar Bhi Hume Yaad Rakho,
Is Se Bada Hamare Liye Koi Inaam Nahi

9.) Phoolon ki har kali khushboo de aap ko,
Suraj ki har kiran roshni de aapko,
Hum to kuch dene ke kaabil nahin,
Dene waala har khushi de aap ko.

10.) Dosti toh sirf ek ittefaaq hai, Yeh toh dilon ki mulaakaat hai, Dosti nahi dekhti yeh din hai ki raat hai, Isme toh sirf wafaadaari aur jasbaat hai !

11.) Log kehte hai ki itni dosti mat karo ke dost dil par sawar ho jaye. Hum kehte hain dosti itni karo ke dushman ko bhi tumse pyar ho jaye

12.) "Hum unka intezaar karte hi reh gaye...
Tumhari judaai ko sehte hi reh gaye...
Dil thamne ki koshish ki magar...
Ye kambakht aansu behte hi reh gaye..."

13.) Dosti mein dil ka tamasha dekha nahi jata, humse tuta hua sisa dekha nahi jata, apne hisse ki khusiya bhi de du tujhe, aye dost tera utra hua chehra dekha nahi jata
14.) "Jo sab dete hain wo hum nahi denge... Pyar jab bhi denge kam nahi denge... Yakin na aaye to aazma lena... Zindagi mein aapko kabhi gham nahi denge...."
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