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31 Mar 2011

कभी चढ़ तो कभी उतर जाएँ

कभी चढ़ तो कभी उतर जाएँ
लहर बन कर मगर किधर जाएँ

इसलिए भी कुरेदा करते हैं
ज़ख्म दिल के कहीं ये भर न जाएँ

दिया है ज़ख्म अब न देना दवा
टुकड़े दिल के न सब बिखर जाएँ

लौट आयें हैं हम तेरे दिल से
आप भी बस अब अपने घर जाए

कौन हमको मानाने आएगा
आप ही रूठ कर अगर जाएँ

दिल "सागर" से लगाये ही रखना
भूल से भी न वो सुधर जाएँ

सीने में ज़ख़्म

सीने में ज़ख़्म उतारे चले गए
जो हमपे गुज़री गुज़रे चले गए

उम्र दराजी की दुआ मिली जब
दूर हमसे हमारे चले गए

वोह आएगा एक दिन मिलने हमसे
नाम उसका ही पुकारे चले गए

सर्द हवा का झोखा कुछ ऐसा चला
काफिला छोड़ बंजारे चले गए

कहाँ देखें वो रोशन चिराग "सागर"
मुद्दतें बीती वोह नज़ारे चले गए

1 Feb 2011

फडफडाकर रखे हें

परिंदों ने पर फडफडाकर रखे हें ।
आसमां पर निगाहें जमा कर रखे हें ।
मिले जख्म जितने भी दिल को अभी तक ,
सीने से अपने लगा कर रखे हें ।
कहीं जल न जाए ये दामन वफ़ा का ,
दिये आंसुओं के बुझाकर रखे हें ।
खुदा जानता है मिरे दिल की हालत ,
कई राज जिसने छुपाकर रखे हें ।
ग़मों ने सताया ,रुलाया हमेशा ,
मगर मैंने रिश्ते बनाकर रखे हें ।
नजर लग न जाए कहीं इस जहां की ,
मुहब्बत के किस्से छुपाकर रखे हें
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