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11 Apr 2013

होटों पर हँसी

कभी होती थी तनहाइयों में भी मेरे होटों पर हँसी,
आज महफिलों में भी मुझे दर्द-ऐ-दिल हुआ करता है.
मेरे जीने की आरजू करते थे मेरे दुश्मन भी कभी,
आज मेरा हमदर्द भी मेरी रुक्सती की दुआ करता है.

समझता था ख़ुद को खुशनसीब जिसे मेरे दिल में पनाह मिलती थी,
आज अश्क भी मेरी आंखों में ख़ुद को यतीम समझता है.
खूबसूरत होता था हर वो कलाम जो मैं कलम से लिकता था,
आज लहू से लिखा "एहसास" भी ख़ुद को अल्फाज़ समझता है.

कभी जीता था मेरा कातिल भी मेरी आशिकुई की उम्मीद में,
आज मेरा दिल भी मेरी ज़िन्दगी के लिए कहाँ धड़कता है.
क्या होती है बेवफाई ये तो कभी मालूम न था,
आज ज़र्रा ज़र्रा मेरा मोहब्बत के लिए तड़पता है.

14 Jul 2011

तेरी यादों को सीने से लगाया तो आंसू निकले

उनकी तस्वीर को सीने से लगा लेते है,
इस तरह जुदाई का गम मिटा लेते है,
किसी तरह ज़िक्र हो जाये उनका,
तो हंस कर भीगी पलकें झुका लेते है.


तेरी यादों को सीने से लगाया तो आंसू निकले ,

इस तरह से दिल को बहलाया तो आंसू निकले ,

तेरी महफ़िल तेरे जलवे तेरी बातों का हुनर ,

जब किसी ने आकर सुनाया तो आंसू निकले ,

एक जज्बा था तुम्हे पाने की खवाहिश थी ,

तुमने जब हमको भुलाया तो आंसू निकले ,

तुम हमें कहते थे चश्मे नूर हो मेरे ,

जब हमें आँखों से गिराया तो आंसू निकले ,
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